सोमवार, नवंबर 13, 2006

तुम

तुम्हे किसी की ज़रुरत नहीं होती
मगर सबकी किस्मत ऐसी नहीं होती.

हालात सबके होते है जुदा-जुदा
ज़ीस्त सबकी एक ढाचें में ढली नहीं होती.

तुम भी औरों की तरह समझ न पाए हमको
वर्ना तुमने कुछ बातें कही नहीं होतीं.

तुम हमारी दुआओं के मोहताज नहीं फिर भी
बहारों से आबाद रहो ये दुआ है फिर भी.

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