तुम्हे किसी की ज़रुरत नहीं होती
मगर सबकी किस्मत ऐसी नहीं होती.
हालात सबके होते है जुदा-जुदा
ज़ीस्त सबकी एक ढाचें में ढली नहीं होती.
तुम भी औरों की तरह समझ न पाए हमको
वर्ना तुमने कुछ बातें कही नहीं होतीं.
तुम हमारी दुआओं के मोहताज नहीं फिर भी
बहारों से आबाद रहो ये दुआ है फिर भी.
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें