गुरुवार, अगस्त 14, 2008

सवाल


सवाल बहुत सारे हैं ,

कुछ सीधे ,कुछ उलझे हैं


कुछ सवालो के जवाब मिल जाते हैं

कुछ मुंह ताकते रह जाते हैं

कुछ अपना रास्ता ढूंढ़ लेते हैं

कुछ माझी को ही ढूढते रह जाते हैं


सवाल बहुत सारे हैं

कुछ सीधे ,कुछ उलझे हैं


कुछ दिल को सुकून की चादर में लपेट जाते हैं

कुछ आँखों की नींद ही उड़ा ले जाते हैं

कुछ दिलो-दिमाग के कोहरे को हटा जाते हैं

कुछ घटा की तरह छा जाते हैं


सवाल बहुत सारे हैं

कुछ सीधे ,कुछ उलझे हैं


कुछ उठते गुबार को रोशनी दिखाते हैं

तो कुछ अपना वजूद ही ढूढते रह जाते हैं

अब आ भी जा मौला मेरे

मेरे सवाल तेरा इंतज़ार किए जाते हैं




गुरुवार, मई 22, 2008

श्यामसखा

मन के सागर मे लहरे सी उठती है
सांसे मेरी तेरी खुशबू को तरसतीं हैं
साथ रहे मेरे साथ हर रूप में तेरा
रोशन हो जाए तुझसे कण-कण मेरा
सखा तू ही, पिता भी तू ही,
बरसों इन्तज़ार किया जिसका,
वह प्रियतम भी तू ही
जिस प्रेम में भीगने को तरसता है मन मेरा
वह अहसास, छुअन भी तू ही
समर्पण न जानू, ना ही जानू पूजा करनी
फिर भी दीवानी तू बना ले मुझे अपनी
सारे स्वर मेरे समर्पित हैं तुझको
बस वाणी तू मुझे बना ले अपनी
वदन मेरा सदा वंदन करे तेरा
शब्द भी तेरे और प्रवाह भी हो तेरा
तुझसे ही जीवन मेरा रंगा और बंधा
तू ही श्याम सखा मेरा, मैं तेरी अनुराधा