गुरुवार, अगस्त 14, 2008

सवाल


सवाल बहुत सारे हैं ,

कुछ सीधे ,कुछ उलझे हैं


कुछ सवालो के जवाब मिल जाते हैं

कुछ मुंह ताकते रह जाते हैं

कुछ अपना रास्ता ढूंढ़ लेते हैं

कुछ माझी को ही ढूढते रह जाते हैं


सवाल बहुत सारे हैं

कुछ सीधे ,कुछ उलझे हैं


कुछ दिल को सुकून की चादर में लपेट जाते हैं

कुछ आँखों की नींद ही उड़ा ले जाते हैं

कुछ दिलो-दिमाग के कोहरे को हटा जाते हैं

कुछ घटा की तरह छा जाते हैं


सवाल बहुत सारे हैं

कुछ सीधे ,कुछ उलझे हैं


कुछ उठते गुबार को रोशनी दिखाते हैं

तो कुछ अपना वजूद ही ढूढते रह जाते हैं

अब आ भी जा मौला मेरे

मेरे सवाल तेरा इंतज़ार किए जाते हैं