दिल ढूंढता है वो रिश्ते
जो न कभी थे हमारे वास्ते
चल पडे़ उनके पीछे मगर फिर भी
हमसे अलग ही रहे उनके रास्ते
रिश्तों से अपनी आँख मिचौली पुरानी है
मगर हार हर बार हमने ही मानी है
रिश्तों से उठी दर्द की बारिश में
बार-बार जाँ हमने ही गवाँई है
बारिश की उन बूँदों को महसूस किया है हमने
दर्द से अपना दामन चाक-चाक किया है हमने
क्यूँ मेरे साथ नहीं रह पाता?
"मरासिम" जिसका बरसों इंतज़ार किया है हमने
बुधवार, दिसंबर 13, 2006
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