
सवाल बहुत सारे हैं ,
कुछ सीधे ,कुछ उलझे हैं
कुछ सवालो के जवाब मिल जाते हैं
कुछ मुंह ताकते रह जाते हैं
कुछ अपना रास्ता ढूंढ़ लेते हैं
कुछ माझी को ही ढूढते रह जाते हैं
सवाल बहुत सारे हैं
कुछ सीधे ,कुछ उलझे हैं
कुछ दिल को सुकून की चादर में लपेट जाते हैं
कुछ आँखों की नींद ही उड़ा ले जाते हैं
कुछ दिलो-दिमाग के कोहरे को हटा जाते हैं
कुछ घटा की तरह छा जाते हैं
सवाल बहुत सारे हैं
कुछ सीधे ,कुछ उलझे हैं
कुछ उठते गुबार को रोशनी दिखाते हैं
तो कुछ अपना वजूद ही ढूढते रह जाते हैं
अब आ भी जा मौला मेरे
मेरे सवाल तेरा इंतज़ार किए जाते हैं
3 टिप्पणियां:
हे...बहोत खूब !!
अनू, एकदम मस्त कविता आहे...keep it up !
cute hai...
Ekdam khare ahe!
Aapan jivanat uttar shodhat asto,kahi milata,kahi milat nahi.
Tase pahile tar Jivan Jagane hech Eka Prashna-Uttar chi ladhai ahe.
Aaapn ti shevat paryant ladhat asato.
Kavita chan ahe
Anil Khopkar
एक टिप्पणी भेजें